17 लाख का ‘कच्चा’ चेक डैम: सरकारी पैसे पर भ्रष्टाचार की दरारें, जांच के घेरे में सरपंच और इंजीनियर ।
स्थान: ग्राम पंचायत कोयलारीकला, जनपद पंचायत पंडरिया, कबीरधाम।
मुख्य विवाद: निजी भूमि (खसरा नंबर 902/1) पर सरकारी निर्माण।
लागत: लगभग 17 लाख रुपये।
प्रमुख शिकायतें: निर्माण कार्य में घटिया सामग्री, पहली बारिश में दरारें और धंसाव।
मांग: निष्पक्ष तकनीकी जांच और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों/सरपंच पर कार्रवाई।
कबीरधाम जिले की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी कामकाज की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। पंडरिया जनपद की ग्राम पंचायत कोयलारीकला में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत बना 17 लाख रुपये का चेक डैम, निर्माण के कुछ ही समय बाद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। पहली बारिश में ही इस चेक डैम ने अपने निर्माण की पोल खोल कर रख दी है।”

सवाल सिर्फ 17 लाख रुपये का नहीं है, सवाल उन दावों का है जो निर्माण के समय किए गए थे। गांव के निवासी येकल सिंह ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत दी है। उनका आरोप है कि यह चेक डैम उनकी निजी भूमि—खसरा नंबर 902/1—पर बिना उनकी सहमति और बिना किसी उचित प्रक्रिया के बनाया गया है।
अगर यह जमीन वाकई निजी है, तो फिर सरकारी खजाने से पैसा यहाँ कैसे खर्च हुआ? क्या प्रशासन ने निर्माण से पहले राजस्व अभिलेखों की जांच नहीं की थी? ये वो बुनियादी सवाल हैं, जिनका जवाब आज हर ग्रामीण मांग रहा है।”

चेक डैम को पानी रोकने के लिए बनाया जाता है, लेकिन कोयलारीकला में तो यह पहली बारिश में ही धंसने लगा है। निर्माण में ऐसी दरारें पड़ गई हैं कि अब इसके भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। यदि यह हालत पहली बारिश में है, तो आने वाले समय में यह स्ट्रक्चर कैसे टिकेगा? यह साफ तौर पर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और काम में बरती गई लापरवाही की ओर इशारा करता है।”
मुख्य बिंदु जो जांच की मांग करते हैं:
जवाबदेही किसकी ?: उपयंत्री (इंजीनियर) ने स्थल का सत्यापन क्यों नहीं किया? निर्माण के दौरान तकनीकी अमला कहाँ था?
निजी भूमि का विवाद: क्या निजी भूमि को सरकारी रिकॉर्ड में सरकारी जमीन दिखाकर राशि का बंदरबांट किया गया है?
गुणवत्ता का मापदंड: 17 लाख की लागत से बने डैम में क्या घटिया सामग्री का उपयोग हुआ है, जो इतनी जल्दी दरारें आ गईं?

अब नजरें टिकी हैं कबीरधाम के जिला प्रशासन और जनपद पंचायत पंडरिया पर। क्या प्रशासन इस मामले में कागजी खानापूर्ति करेगा, या वाकई में मौके का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करवाकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी?
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—सरपंच से लेकर उपयंत्री और संबंधित तकनीकी अमले तक, जो भी इस भ्रष्टाचार में शामिल है, उस पर कानूनी कार्रवाई हो। क्योंकि यह सिर्फ एक चेक डैम नहीं, बल्कि जनता के उस टैक्स के पैसे का अपमान है जो विकास के नाम पर खर्च हुआ था।”
देखना यह होगा कि क्या दोषियों पर शिकंजा कसा जाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।