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July 23, 2026 7:50 am

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कवर्धा – जहाँ ‘सूचना पटल’ गायब, वहाँ भ्रष्टाचार का साया: रेंगाटोला पुलिया निर्माण पर उठे गंभीर सवाल।

कवर्धा – जहाँ ‘सूचना पटल’ गायब, वहाँ भ्रष्टाचार का साया: रेंगाटोला पुलिया निर्माण पर उठे गंभीर सवाल।

सहसपुर लोहारा जनपद के ग्राम रेंगाटोला से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना की पोल खोलती है। यहाँ पुलिया का निर्माण तो हो रहा है, लेकिन पारदर्शिता और गुणवत्ता पूरी तरह गायब है। विकास के नाम पर क्या यहाँ सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है? देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट।”

मनरेगा योजना—जिसका उद्देश्य है गाँव का विकास और ग्रामीणों को सम्मानजनक रोजगार। लेकिन सहसपुर लोहारा के ग्राम पंचायत पटपर के रेंगाटोला में यह योजना अब ‘भ्रष्टाचार का पर्याय’ बनती जा रही है। यहाँ बन रही पुलिया न केवल नियमों को ताक पर रखकर बनाई जा रही है, बल्कि इसकी गुणवत्ता पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे पहला और बड़ा सबूत लापरवाही का है—’सूचना पटल’ का न होना। नियम कहता है कि हर काम के पास उसका ब्यौरा (Information Board) होना चाहिए। बजट कितना है? काम कौन कर रहा है? मजदूरी क्या है? लेकिन रेंगाटोला में यह सब गुप्त है। क्यों? क्या अधिकारियों के पास छिपाने के लिए कुछ है?

ग्रामीणों का कहना है कि इस्तेमाल हो रही सामग्री की क्वालिटी इतनी खराब है कि यह पुलिया पहली बारिश भी झेल पाएगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है। आज जो पुलिया बन रही है, कल वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर दरारों में बदल जाएगी। और इसका खामियाजा कौन भुगतेगा? ग्रामीण जनता!

सवाल सिर्फ निर्माण का नहीं है, सवाल निगरानी का भी है। उपयंत्री और तकनीकी सहायक कहाँ हैं? क्या उनकी मौन सहमति के बिना यह सब संभव है? क्या रेंगाटोला का यह प्रोजेक्ट फाइलों में तो पक्का, लेकिन जमीन पर खोखला बनकर रह जाएगा?

रेंगाटोला के ग्रामीण अब निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि उनका पैसा मिट्टी में मिले। अब गेंद जनपद पंचायत के पाले में है। क्या जिम्मेदार अधिकारी रेंगाटोला की इस पुलिया की गुणवत्ता और पारदर्शिता की जांच कराएंगे? या फिर यह मामला भी पुरानी शिकायतों की तरह दफ्तरों की धूल में दब जाएगा?
​रेंगाटोला की जनता जवाब मांग रही है, और इस बार केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई की दरकार है।

दोनों राज्यों में विकास की नई गति ।
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