Explore

Search

September 5, 2026 7:42 am

Our Social Media:

WhatsApp Image 2026-07-03 at 10.33.15 (1)
WhatsApp Image 2026-07-03 at 10.33.15
WhatsApp Image 2026-06-29 at 10.17.50

सिकल सेल मुक्त भारत की दिशा में बड़ा कदम : दुर्ग के MRHRU झीट में विशेषज्ञों ने दी सिकल सेल प्रबंधन और उपचार की कमान ।

देश और राज्य से सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन और इसके बेहतर प्रबंधन को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार गंभीर प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में आज दुर्ग जिले के झीट स्थित मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च यूनिट (MRHRU) में सिकल सेल रोग (SCD) के प्रबंधन और रोकथाम पर एक दिवसीय सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण आईसीएमआर-राष्ट्रीय जनजाति स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (ICMR-NIRTH) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें जिले के चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
​वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञों की रही गरिमामयी उपस्थिति
​इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में चिकित्सा क्षेत्र के कई नामचीन विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने शिरकत की।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से :

​डॉ. प्रवीण भारती
​डॉ. रविन्द्र कुमार
​डॉ. अनिल गोयल
​डॉ. सुयेश श्रीवास्तव
​डॉ. नेहा गुरबानी
​डॉ. उपेंद्र भेलें

​सहित MRHRU झीट के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए जमीनी स्तर पर सिकल सेल के मरीजों की पहचान और उनके इलाज को लेकर डॉक्टरों का मार्गदर्शन किया।
​इन महत्वपूर्ण विषयों पर दी गई विस्तृत जानकारी
​प्रशिक्षण सत्र के दौरान सिकल सेल रोग के हर पहलू पर बारीकी से चर्चा की गई, ताकि स्वास्थ्यकर्मी फील्ड में जाकर मरीजों को सही परामर्श और इलाज दे सकें।

मुख्य विषय निम्नलिखित रहे:

​रोग का समग्र अवलोकन और जटिलताएँ :

सिकल सेल के लक्षणों की शुरुआती पहचान और मरीजों में होने वाली शारीरिक जटिलताओं (रुग्णता प्रोफाइल) का गहन विश्लेषण।
​राज्य स्तरीय नियंत्रण रणनीतियाँ: छत्तीसगढ़ शासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिकल सेल नियंत्रण के लिए चलाई जा रही योजनाओं और रणनीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर।

​आनुवंशिक परामर्श (Genetic Counselling): विवाह पूर्व या गर्भधारण के समय दी जाने वाली परामर्श सेवाओं की महत्ता, ताकि आने वाली पीढ़ी को इस बीमारी से बचाया जा सके।
​नवजात शिशु जांच (Newborn Screening): शिशुओं में जन्म के तुरंत बाद सिकल सेल की स्क्रीनिंग करने की तकनीकों पर चर्चा, जिससे शुरुआती दौर में ही इलाज शुरू किया जा सके।

​हाइड्रॉक्सीयूरिया उपचार दिशानिर्देश: सिकल सेल के मरीजों के लिए बेहद कारगर मानी जाने वाली दवा ‘हाइड्रॉक्सीयूरिया’ के सही डोज और उपचार संबंधी नवीनतम गाइडलाइंस की विस्तृत जानकारी।
​सहकर्मी समूह सहयोग (Peer Group Support): मरीजों और उनके परिवारों को मानसिक व सामाजिक संबल देने के लिए सपोर्ट ग्रुप्स की भूमिका पर प्रकाश।
​संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ समापन
​कार्यक्रम का अंतिम सत्र बेहद जीवंत रहा, जहाँ उपस्थित डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने फील्ड में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर विशेषज्ञों से सवाल किए। विशेषज्ञों ने बेहद सरल तरीके से सभी शंकाओं का समाधान किया।

​विशेषज्ञों का संदेश : “सिकल सेल से डरने की नहीं, बल्कि सही समय पर सही प्रबंधन और काउंसिलिंग की जरूरत है। यदि हम शुरुआती स्तर पर ही इसकी पहचान कर लें, तो मरीज एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।”
​इस एक दिवसीय प्रशिक्षण से जिले के स्वास्थ्य ढांचे को सिकल सेल से लड़ने में एक नई मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया गया।

दोनों राज्यों में विकास की नई गति ।
LETEST ARTICALS